Thursday, December 30, 2010

वेदना

याद आई तुम्हारी तो मुस्कायेंगे ;
जिक्र आया कभी तो मुकर जायेंगे ;
दर्द सीने में इतना दफ़न कर लिया....
ये न पूछो के अब हम किधर जायेंगे !!

राह तनहा सही, स्वप्न मंजिल सही;
वक़्त ठहरा सही, धुंध है हर कहीं ;
किन्तु मंजर से धड़कन छुपाते हुए....
बिन निशाँ के यहाँ से गुजर जायेंगे !!

स्वर्ण निखरेगा चाहे हो कितनी तपिश;
है पतंगे की हस्ती शमा की कशिश ;
जुड़ के कुदरत कि फेहरिस्त में, एक दिन .....
है यकीं  - ज़ख्म भर कर सँवर जायेंगे !!